Saturday, May 12, 2012
ऐसा वादा न कर मुझसे की तू निभा न सके, इतना दूर न जा की कभी मुझ पे हक़ जता न सके, गलत्फमियों से न लगा नफरत की आग, की चाह कर भी तू बुझा न सके, न खीच दिल के आईने पे कुछ ऐसी रेखाएं जो चेहरा बदल दे, की अपनी ही सूरत तू धडकनों को कभी दिखा न सके, न बांध ज़माने के रिश्तों में मासूम प्यार को तू आज, की कल खुदा सी मोहब्बत के जस्बातों को तू कुछ समझा न सके, है दम तेरी नफरत में तो छोड़ दे तस्बूर में भी मेरा ख्याल, कहीं ऐसा न हो एक पल के लिए भी तेरी साँसे मुझे भुला न सके, नामो निशा भी न छोड़ तू मेरी किसी निशानी का अपने पास, लेकिन वक़्त के हाथ तेरे चेहरे से मेरे प्यार का निशा मिटा न सके, सजा दिया नए रिश्तो की रौशनी ने मन तेरा जीवन, पर यादों के लम्हों की दाल से ये मेरा नाम हाथ न सके, इंसा से लेके खुदा तक सबने जिसे मिटाना चाहा ऐसी मोहब्बत को भुलाने के लिए हम खुद को मन न सके, न कर इतना शर्मिंदा मेरी मोहब्बत को आज, की कल तू इस इश्क को अपने दिलके महल में सजा न सके...
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