क्यूँ प्यार उस पर ही आता है
जो मिल कर भी ना मिल पता है ?
कैसे ये उसे बताएं हम
तुझ बिन रह ना पायें हम ??
क्यूँ बार-बार वो सताता है
खुआबों में आकर रुलाता है ?
भुलाना उस को चाहे हम
पर किस तरह भुलाएँ हम ??
वो मन में हर दम रहता है ,
dharkan की तरह dharakta है
हैं इसी एहसास से जिन्दा हम
हैं एक-दूजे के दिल ओ जान हम
एक दूजे के दिल में रहते हैं
क्या प्यार इसी को कहते हैं ??
* * *

No comments:
Post a Comment