Saturday, October 10, 2009

मेरे दिल के कोने से............................

सृष्टि में जो कुछ सकून भरा है, प्रेम है । प्रेम ही है जो संबंधों को जीवित रखता है । परिवार के प्रति प्रेम जिम्मेदारी सिखाती है । प्रेम इन्सान को विनम्र बना देता है । प्रेम व्यक्ति विशेष के प्रति हो या इश्वेर के, आश्चर्यजनक रूप से उसकी सोच, उसका व्यवाहर , उसकी वाणी सब कुछ परिवर्तित हो जाता है।
प्यार जिन्दगी का सबसे हसीन जज्बा है, बोलने में जितना मीठा है, उसका एहसास उतना ही खुबसूरत और प्यारा है । इसे व्यक्त करने के लिए शब्दों की आवयश्यकता नहीं होती । व्यक्ति की आँखें , चेहरा, हाव-भाव यहाँ तक की सांसें , दिल का सब भेद खोल देती है ।
प्रेम की दुनियाँ में खो कर कोई भी बाहर आना ही नहीं चाहता । वह जिसे प्यार करता है , खुली आंखों से भी उसी के सपने देखा करता है । उसके साथ बिताये समय को वो बार- बार याद करने की कोशिश करता है, और उस याद में ऐसा समां जाना चाहता है जैसे की दुनियाँ से उसको कोई मतलब ही नहीं है । उसके लिए सजना- सवरना चाहता है । औरों से बात करते वक्त भी उसी का जिक्र करना चाहता है । यही प्यार का दिवानापन है
प्रेम शाश्वत है , प्रेम सोच समझ कर की जाने वाली चीज़ नहीं है। कोई कितना भी सोचे , यदि उसे प्रेम हो गया है तो उसके लिए दुनियाँ कि हर एक चीज़ गौण हो जाती है । प्रेम कि अनुभूति बहुत हि आनंदमाय होता है । प्यार कब हो जाता है, पता ही नहीं चलता । इसका एहसास तो तब होता है जब मन सदेव किसी का सामीप्य चाहने लगता है। उसकी मुस्कराहट पर मन खिल उठता है , और उसके दर्द से तड़पने लगता है । उस पर सर्वश्व समर्पित करने को दिल करता है बिना किसी स्वार्थ के । सच्चा प्यार बदले में कुछ नहीं चाहता , बल्कि उसकी खुशियाँ के लिए बलिदान पर चढ़ जाता है। प्रिय कि निष्ठुरता भी उसे (प्रेम) कम नहीं कर सकती । वास्तव में प्रेम के पथ पर प्रेमी और प्रेमिका दो नहीं एक हुआ करते है । एक कि खुशी दुसरे के आँखों में छलकती है और दुसरे के दुःख से किसी कि आँखों भर आती है । प्रेम एक तपस्या है जिसमे मिलने कि खुशी , बिछड़ने का दुःख प्रेम का उन्माद , विरह का तप सब कुछ सहना होता है। प्रेम की प्राराकाष्ठा का एहसास तो तब होता है जब वह किसी से दूर हो जाता है। दुरी का दर्द मीठा होता है । कशक उठती है मन में बयां नही किया जा सकता । दुरी प्रेम को बढाती है और पुनर्मिलन का वह सुख देती है , जो अद्वतीय होती है। बिच्छोह का दुःख मिलने न मिलने की आशा - आशंका में जो सहमे व्यतीत होता है , वह जीवन का अमूल्य अंश होता है । उस तड़प का अपना एक अलग आनंद होता है । प्यार और दर्द में गहरा रिश्ता होता है , जिस दिल में दर्द ना हो उस दिल में प्यार का एहसास भी नही होता है। किसी के दूर जाने पर जो खालीपन (अकेलापन) लगता है, जो टीस दिल में उठती है, वही तो प्यार का दर्द है , इसी को तो लोग प्यार samajhte हैं .

8 comments:

  1. बड़ी भावूक लेख लिखा है आपने। अच्छा है।

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  2. स्वागत है आपका ब्ॉगजगत में

    सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

    सादर

    -समीर लाल 'समीर'

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  3. उम्दा आलेख.......

    वाह !

    बहुत ख़ूब लिखा


    आपको और आपके परिवार को दीपोत्सव की

    हार्दिक बधाइयां

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  4. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
    आप को बधाई और दीपावली की शुभकामनाएं !!
    ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

    - सुलभ सतरंगी (यादों का इंद्रजाल वाले )

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  5. सुबह -सुबह आप का झूठ पढ़ा -हां सचमुच आले दर्जे के झूठे हो भाई
    भला जो व्यक्ति प्रेम पर इतनी सारग्रभित बात लिखे वह खुद को अकेला कहे उसे झूठा नहीं तो क्या कहें हम-दिल से डूबकर आपने लिखा बधाई और सच मानिये दिल से ही हमने पढ़ा और फ़िर जो बात दिल में आई लिख भी दी-इतना प्रेम दिल में लेकर आप अकेले कहां हैं-कहिये- ब्लॉग जगत पर स्वागत है- लिखते रहें ऐसे ही दर्द की सियाही मे दिल की कलम डुबो कर
    पुन: बधाई
    श्याम सखा श्याम
    दीप सी जगमग आपकी जिन्दगी करे
    प्रेम का निर्झर नित मन-मन्दिर ्झरे

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  6. हां एक बिन मांगी सलाह्भी
    यह बैरी word veri हटाएं जिससे और अधिक कमेन्ट पाएं
    श्याम सखा श्याम
    http://gazalkbahane.blogspot.com/
    http://katha-kavita.blogspot.com/

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  7. आज बस राम-राम। दोस्त को भी और उनको भी जो मुझे अपना दुश्मन समझतें हैं या वो मेरे दुश्मन है। राम राम अपनों को भी,परायों को भी। अच्छे को भी, बुरे को भी।
    इस धरा पर रहने वाले सभी जीवों को, जड़ को, चेतन को, अवचेतन को दिवाली की राम-राम।

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  8. dil ke koney men chhipe prem ka swagat,deepawali ki mangal kamanayen

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